Education Update
बिहार के भोजपुर जिले की रहने वाली छोटी कुमारी सिंह दुनिया भर के लिए एक मिसाल बन गई हैं. उन्हें उनके बेहतरीन काम के लिए स्विट्जरलैंड बेस्ड वुमन्स वर्ल्ड समिट फाउंडेशन की तरफ से वुमेन्स क्रिएटिविटी इन रुरल लाइफ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है. उन्हें यह सम्मान अपने इलाके में मुसहर जाति जैसे अति पिछड़े वर्ग के बच्चों को शिक्षित करने के लिए दिया गया है. छोटी ने 2014 में अपने गांव रतनापुर से इस काम की शुरुआत की थी.
छोटी के अनुसार उन्हें ऐसे बच्चों को पढ़ाने की प्रेरणा उनकी आध्यात्म गुरु के पास जाने से मिली. वह चाहती है कि देश भर में 101 ऐसे गांव के बच्चों को वह शिक्षित कर पाए. छोटी इस सम्मान को पाने वाली सबसे युवा कैंडिडेट हैं. छोटी अपने इलाके में यह काम उन वर्ग के बच्चों के लिए भी करती हैं जिनके अभिभावक के पास जमीन तक नहीं है और सिर्फ मजदूरी करके अपना गुजर-बसर करते हैं. उन्होंने इस प्रोग्राम के शुरुआत में उन बच्चों को फ्री में ट्यूशन देना शुरू किया था जो स्कूल से आने के बाद यूं ही घूमा करते थे.बच्चों को पढ़ाते हुए छोटी ने उनके अभिभावकों को भी अपने साथ शामिल किया. उसने सभी को प्रेरित किया कि वह हर महीनें में कम से कम 20 रुपये की सेविंग करें. बाद में उसने यह पैसा कॉमन बैंक में जमा कराना शुरू किया. इससे जब गांव वालों को फायदा होना शुरू हुआ तो उन्होंने छोटी के पास आसपास के गांवों की महिलाओं को भी भेजना शुरू किया. इसके साथ ही आसपास के गांव के बच्चे और बच्चियां भी उसके पास पढ़ने आने लगे.
बिहार के भोजपुर जिले की रहने वाली छोटी कुमारी सिंह दुनिया भर के लिए एक मिसाल बन गई हैं. उन्हें उनके बेहतरीन काम के लिए स्विट्जरलैंड बेस्ड वुमन्स वर्ल्ड समिट फाउंडेशन की तरफ से वुमेन्स क्रिएटिविटी इन रुरल लाइफ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है. उन्हें यह सम्मान अपने इलाके में मुसहर जाति जैसे अति पिछड़े वर्ग के बच्चों को शिक्षित करने के लिए दिया गया है. छोटी ने 2014 में अपने गांव रतनापुर से इस काम की शुरुआत की थी.
छोटी के अनुसार उन्हें ऐसे बच्चों को पढ़ाने की प्रेरणा उनकी आध्यात्म गुरु के पास जाने से मिली. वह चाहती है कि देश भर में 101 ऐसे गांव के बच्चों को वह शिक्षित कर पाए. छोटी इस सम्मान को पाने वाली सबसे युवा कैंडिडेट हैं. छोटी अपने इलाके में यह काम उन वर्ग के बच्चों के लिए भी करती हैं जिनके अभिभावक के पास जमीन तक नहीं है और सिर्फ मजदूरी करके अपना गुजर-बसर करते हैं. उन्होंने इस प्रोग्राम के शुरुआत में उन बच्चों को फ्री में ट्यूशन देना शुरू किया था जो स्कूल से आने के बाद यूं ही घूमा करते थे.बच्चों को पढ़ाते हुए छोटी ने उनके अभिभावकों को भी अपने साथ शामिल किया. उसने सभी को प्रेरित किया कि वह हर महीनें में कम से कम 20 रुपये की सेविंग करें. बाद में उसने यह पैसा कॉमन बैंक में जमा कराना शुरू किया. इससे जब गांव वालों को फायदा होना शुरू हुआ तो उन्होंने छोटी के पास आसपास के गांवों की महिलाओं को भी भेजना शुरू किया. इसके साथ ही आसपास के गांव के बच्चे और बच्चियां भी उसके पास पढ़ने आने लगे.


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