बाल विवाह और दहेज प्रथा को मिटाने के लिए को बिहार में

 जंहा एक ओर ऐतिहासिक  मानव शृंखला बनी.  हर गांव, पंचायत, प्रखंड से लेकर जिला एक साथ एक ही कतार से जुड़े.
बच्चे और जवान, बूढ़े और महिलाओं  ने एक दूसरे का हाथ पकड़ कर बाल  विवाह नहीं करने और न दहेज लेने और न देने का सांकेतिक संकल्प लिया साथ ही  सभी ने एक दूसरे का हाथ थाम लिया. 14,019 किमी लंबी मानव शृंखला बनी, जो एक विश्व रिकॉर्ड है. प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार 26 जिलों में एक करोड़ 99 लाख 63 हजार 157 लोग इसमें शामिल हुए, जबकि  39 हजार गांव 8391  हजार पंचायत 534 प्रखंड पिछले साल 21 जनवरी को शराबबंदी के पक्ष में बनी मानव शृंखला में इन जिलों में शामिल लोगों की स‍ंख्या एक करोड़ 91 लाख 72 हजार 211 थी. देर शाम तक 12 जिलों से प्रारंभिक रिपोर्ट नहीं मिली थी. अनुमान है कि इस बार का आंकड़ा पिछले साल के आधिकारिक आंकड़े 3.11 करोड़ को पार कर जायेगा. इसका आकलन करने के लिए लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड की टीमें जिलों में मौजूद थीं.
 
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गांधी मैदान में  उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी और बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी का हाथ थाम कर मानव शृंखला के अंग बने. मुख्यमंत्री ने गांधी मैदान में सफेद और नीले रंग के गुब्बारे उड़ाकर  इसकी  शुरुआत की. प्रभारी मंत्री और प्रभारी प्रधान सचिव अपने-अपने प्रभार वाले जिलों में इसका नेतृत्व किया. राजद और कांग्रेस ने जहां इसका बहिष्कार किया, वहीं जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह के नेतृत्व में पार्टी के नेता स्टैंड रोड में मानव शृंखला बनायी. इनके अलावा हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के नेतृत्व में 12 स्टैंड रोड के बाहर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय और रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व में पार्टी के नेता आयकर गोलंबर पर कतार में खड़े हुए. जबकि लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह पशुपालन मंत्री पशुपति कुमार पारस ने मुजफ्फरपुर में मानव शृंखला बनायी. 

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